अबू राज क्या है?
राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू का नया आधिकारिक नाम। "अबू" प्राचीन स्थानीय नाम है और "राज" राजस्थान की शाही परंपरा का प्रतीक।
27 फरवरी 2026 को राजस्थान सरकार ने आधिकारिक गजट अधिसूचना के माध्यम से माउंट आबू का नाम स्थायी रूप से अबू राज घोषित किया। जानें इस ऐतिहासिक निर्णय की पूरी कहानी।
27 फरवरी 2026 के ऐतिहासिक फैसले और अबू राज की विरासत को समझने के लिए ये प्रमुख तथ्य जानें।
राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू का नया आधिकारिक नाम। "अबू" प्राचीन स्थानीय नाम है और "राज" राजस्थान की शाही परंपरा का प्रतीक।
27 फरवरी 2026 को राजस्थान सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर माउंट आबू का नाम स्थायी रूप से अबू राज रखा। MHA अनुमोदित।
वेद, महाभारत और पुराणों में अर्बुद पर्वत — ऋषि वशिष्ठ की तपस्थली और चार अग्निकुल राजपूत वंशों की जन्मभूमि।
अबू राज नाम से राजस्थान पर्यटन को नया ब्रांड मिलेगा। सरकार विशेष अभियान चला रही है ताकि वैश्विक पर्यटन प्रभावित न हो।
अबू राज राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू का नया, स्थायी और आधिकारिक नाम है। 27 फरवरी 2026 को राजस्थान सरकार ने इस नाम परिवर्तन को गजट अधिसूचना के माध्यम से आधिकारिक रूप दिया। "अबू" इस पर्वत का सदियों पुराना स्थानीय और आंचलिक नाम है, जबकि "राज" राजस्थान की शाही विरासत, गौरव और पहचान का प्रतीक है।
यह नाम परिवर्तन भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) की अनुमति के बाद राज्य सरकार की आधिकारिक अधिसूचना से प्रभावी हुआ। रेलवे, डाक विभाग, सर्वे ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को नए नाम के अनुसार रिकॉर्ड अद्यतन करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान राजपत्र (Rajasthan Gazette), 27 फरवरी 2026 — सिरोही जिले में "Mount Abu" नामक स्थान का नाम स्थायी रूप से "Abu Raj (अबू राज)" घोषित किया जाता है। यह परिवर्तन तत्काल प्रभाव से लागू है।
माउंट आबू, अरावली पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊँची चोटी पर बसा, समुद्र तल से 1,220 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है।
प्राचीन काल में इसे अर्बुद पर्वत कहा जाता था — महाभारत, मत्स्य पुराण और स्कंद पुराण में इसका उल्लेख मिलता है। वैदिक ऋषि वशिष्ठ की तपोभूमि माने जाने वाले इस पर्वत पर की गई यज्ञ से परमार, चाहमान (चौहान), प्रतिहार और चालुक्य जैसी चार प्रमुख राजपूत वंशों का उदय हुआ।
अंग्रेजी शासन के दौरान 1845 में यहाँ सैन्य छावनी स्थापित की गई और इसे "Mount Abu" नाम से आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। बॉम्बे प्रेसीडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में इसने ब्रिटिश प्रशासन में खास जगह बनाई।
"माउंट आबू नाम हमारी भाषा, हमारी संस्कृति का नहीं था। अबू राज — यह नाम इस पर्वत की आत्मा की आवाज है।"
अबू राज ट्रेंड होने का सबसे बड़ा कारण 27 फरवरी 2026 का आधिकारिक निर्णय है। इस दिन राजस्थान मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव पास किया और गजट अधिसूचना के ज़रिए नाम परिवर्तन आधिकारिक हो गया।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में औरंगाबाद का छत्रपति संभाजीनगर, इलाहाबाद का प्रयागराज बनना — इस राष्ट्रीय प्रवृत्ति का ही अगला पड़ाव है अबू राज। सांस्कृतिक पहचान की पुनर्स्थापना का यह आंदोलन राजस्थान में भी गहरी जड़ें पकड़ चुका है।
सिरोही और आसपास के क्षेत्रों के लोग, स्थानीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संगठन, और राजपूत समुदाय लंबे समय से माँग कर रहे थे कि इस पवित्र पर्वत को उसका गौरवशाली भारतीय नाम वापस मिले।
अबू राज की सबसे प्रसिद्ध धरोहर है दिलवाड़ा जैन मंदिर समूह — 11वीं से 13वीं सदी के बीच बने ये पाँच संगमरमर के मंदिर स्थापत्य कला का अद्वितीय नमूना हैं। विमल शाह द्वारा 1031 ई. में निर्मित विमल वसाही मंदिर और लूणवसाही मंदिर — इनकी संगमरमर की नक्काशी दुनियाभर के पर्यटकों को अचंभित करती है।
नक्की झील — मान्यता है कि देवताओं ने अपने नाखूनों से इसे खोदा था। यह पवित्र झील हिंदू श्रद्धालुओं और पर्यटकों का प्रिय स्थल है। यहाँ नौका विहार और सूर्यास्त का दृश्य अविस्मरणीय है।
समुद्र तल से 1,722 मीटर की ऊँचाई पर स्थित गुरु शिखर अरावली की सबसे ऊँची चोटी है। यहाँ से पूरे अबू राज का मनोरम दृश्य दिखता है।
राजस्थान सरकार ने 27 फरवरी 2026 को मंत्रिमंडल की बैठक में माउंट आबू का नाम बदलने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृत किया। उसी दिन राजस्थान राजपत्र में अधिसूचना जारी कर इसे स्थायी घोषित किया गया।
अब सभी सरकारी दस्तावेज़ों, मानचित्रों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और पर्यटन संस्थानों में "अबू राज" (Abu Raj) नाम का उपयोग किया जाएगा।
रेलवे बोर्ड, इंडिया पोस्ट, NH Authority, Google Maps, और Survey of India को नाम परिवर्तन से अवगत कराया जा चुका है। 90 दिनों के भीतर सभी आधिकारिक रिकॉर्ड अपडेट होंगे।
अबू राज नाम से राजस्थान पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। "राज" शब्द राजस्थान की वैश्विक पहचान — "भूमि of राजाओं" — से जुड़ता है, जिससे विरासत पर्यटन की भावना और मजबूत होगी।
राजस्थान पर्यटन विभाग ने विशेष अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग अभियान की घोषणा की है। स्थानीय व्यापारियों और होटल व्यवसायियों ने अबू राज नाम का स्वागत करते हुए कहा कि यह नई पीढ़ी के घरेलू पर्यटकों को और अधिक आकर्षित करेगा।
दिलवाड़ा के संगमरमर से लेकर नक्की झील की शांत लहरों तक — अबू राज हर मौसम में अलग रूप दिखाता है।
माउंट आबू / अबू राज के मंदिरों, झीलों और प्रकृति की खूबसूरती को इस वीडियो में देखें।
अबू राज (माउंट आबू) पर्यटन वीडियो — YouTube पर देखें | हिंदी सबटाइटल उपलब्ध
वैदिक काल से 27 फरवरी 2026 के ऐतिहासिक फैसले तक — इस पर्वत की कहानी।
महाभारत और पुराणों में अर्बुद पर्वत का उल्लेख। ऋषि वशिष्ठ की यज्ञभूमि और चार राजपूत वंशों की पौराणिक उत्पत्ति स्थली।
विमल शाह और अन्य जैन व्यापारियों ने संगमरमर के भव्य मंदिर बनवाए। यह स्थान जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल बन गया।
ईस्ट इंडिया कंपनी ने सैन्य छावनी बनाई और अंग्रेजी रिकॉर्ड में "Mount Abu" दर्ज किया। बॉम्बे प्रेसीडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी बना।
स्वतंत्रता के बाद माउंट आबू राजस्थान का प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र बन गया। हर साल लाखों पर्यटक यहाँ आते रहे।
राजस्थान में सांस्कृतिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने माँग तेज की। राज्य सरकार ने MHA को प्रस्ताव भेजा।
राजस्थान मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव पारित किया। MHA की मंजूरी के साथ गजट अधिसूचना जारी हुई। माउंट आबू अब आधिकारिक रूप से अबू राज है।
✅ गजट अधिसूचित · Gazette Notifiedमाउंट आबू से अबू राज बनने की खबर के बाद लोगों ने सबसे ज्यादा ये सवाल पूछे।
27 फरवरी 2026 का दिन राजस्थान के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। माउंट आबू से अबू राज — यह नाम परिवर्तन केवल एक शब्द का बदलाव नहीं है, यह उस पर्वत की पहचान की वापसी है जो सदियों से अर्बुद पर्वत के नाम से पूजा जाता था।
यह निर्णय भारत की उस भावना का प्रतीक है जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सम्मान देती है। दिलवाड़ा के संगमरमर, नक्की झील की पवित्रता और गुरु शिखर की ऊँचाई — सब अब एक नई, गर्वपूर्ण पहचान के साथ दुनिया के सामने हैं।
पर्यटक, इतिहासकार और राजस्थान के प्रत्येक नागरिक के लिए यह समय है कि वे अबू राज को उसकी पूरी महिमा में जानें, समझें और जाएँ।